Monday, August 18, 2014

What is the difference between Dual Standby and Dual Active?

When buying a dual SIM mobile phone there is one feature that creates a lot of confusion among the customers. It is important to know what Dual Standby and Dual Active really means. Because once you open the handset box pack, there is no turning back. 

So you want to buy a dual SIM and the specifications say it supports dual Standby, do you really know what it is or are you just happy that you can use 2 SIM on a single phone. In most cases customers get disappointed because they never understood the feature. 

Dual Standby Phone : 
 The market is filled with a lot of low cost or high end phones that supports dual Standby mode. Read the word carefully and you will understand what it really means. Dual + Standby, this means the phone supports dual SIM but in Standby mode. In simple words when none of the SIM are used then both the SIM’s are active but when you are using a particular SIM the other SIM becomes inactive.

Another issue with dual standby phones that support 3G is that, when the 3G / 2G network is used the other SIM becomes inactive. Usually you will not notice this issue with normal usage, but try downloading a big file or watch a streaming YouTube video, the other SIM will be unreachable.

In dual standby if a person is using SIM 1 and another person is calling on SIM 2 they will hear the message “not reachable, try again later”.

Many of the dual SIM users usually talk more on one particular SIM and the other SIM is basically for their personal use – not so important, they don’t really have any issues with this mode. If you want both the SIM’s active at all times then this is not the feature you should are looking for. 

Dual Active Phone : 
Again as the same suggest its Dual phone with active mode which means both the SIM’s are active all the time. Dual active is relatively easier to understand.

Use SIM 1 or SIM 2 for voice calls or net surfing the other SIM is always active you can still receive calls on the other SIM and even switch calls for example, you can keep the caller on SIM 1 on hold and talk to the other user on SIM 2.

There are very few dual Active phones available in India, so if you need this functionality make sure you choose the right option.

The Dual Standby phones use a single transceiver which at a given time can server only one SIM, whereas most dual Active phones comes dual transceiver, one for each SIM.

Do check before you buy the dual active phone because even when the manufacture says that it is dual active it still works like a dual standby.

Wednesday, April 30, 2014

तेरे जाने के बाद.....

मैं नही जानता क्या हैं जहन में मेरे, मगर कुछ फीका फीका सा हैं...
तेरे जाने के बाद.....
मुझे नही मालूम तूने छोड़ा मुझे या मैंने तुझे, पर लगता है कुछ खो गया...
तेरे जाने के बाद.....
दिल का बाग़ था गुलजार, रंग, खुश्बू और बहार से, अब बस पतझड़ का मौसम हैं...
तेरे जाने के बाद.....
बड़े अरमान सजाये थे ज़िन्दगी में अपने, सब कुछ बिखर गया...
तेरे जाने के बाद.....
टूट कर चाहा तुझे पर बता न सका, आज सिर्फ यही गिला हैं...
तेरे जाने के बाद.....
सफ़र, हमसफ़र, दर्द, हमदर्द, मोहब्बत और इश्क, सब कुछ जैसे एक मजाक हैं...
तेरे जाने के बाद.....
कोई और न आ सकेगा इस दिल के कभी करीब, भरोसा ही उठ गया हैं, भरोसे से...
तेरे जाने के बाद.....
तू खुश रहे, आबाद रहे, कामयाब रहे, बस यही आखरी दुआ है, तेरे जाने के बाद...
तेरे जाने के बाद..... तेरे जाने के बाद..... 

Monday, April 28, 2014

जब सज्जन लोग जरूरत से ज्यादा सरल हो जाते हैं, 
तब समाज में दुष्ट लोगों की वृद्धि होने लगती है...

Sunday, March 23, 2014

भगत सिंह..........................................

मार्च २३ १९३१ ... करीब... अस्सी साल बीत गए थे... वो लाहोर जेल के बाहर आज फिर खडा था... अब भी उसे वो दिन याद था... बहुत भीड़ थी जेल के बाहर.... दो और साथी भी थे उसके... फाँसी पर हँसते हँसते चढ़ा था वह.. वही हंसी आज भी उसके चेहरे पर थी.. देश आज़ाद जो हो चुका था... अस्सी साल बीत गए थे ... बहुत आगे बढ़ गया होगा देश... बहुत कुछ बदल गया होगा...

आखिर जान दी थी उसने... जान.. 

वह इधर उधर देखने लगा... रात बहोत हो चुकी थी... कोई नज़र नहीं आ रहा था... वह आगे की तरफ बढ़ गया... दूर एक दीवार से सटी खुर्सी पर एक बूढा चौकीदार सो रहा था.... वह चौकीदार के पास पहुंचा .. अपना हाथ उसके कंधो पर रखा और .. धीरे से उसे उठाया... "भाई साहब... भाई साहब....."

नीद कच्ची थी.. चौकीदार ने चेहरा उठा कर उसके चेहरे की तरफ देखा... कुछ जाना पहचाना सा चेहरा लगा... पर याद नहीं था .. किसका.. जाना पहचाना तो था....

"हाँ भाई... इतनी रात अकेले घूम रहे हो... क्या चाहिए" चौकी दार ने चेहरा याद करने की कोशिश करते हुए.. उस से पुछा


"सब कैसा चल रहा है.. सब कुछ ठीक है ना देश में..हम आज़ाद हैं न अब "

सवाल ही कुछ ऐसा था .. की चौकीदार को याद आ गया.. की चेहरा किसका था...

"आप भगत सिंह हैं ना... भगत सिंह.... "

वोह हल्का सा मुस्कुराया... "हाँ...भगत सिंह ही हूँ.. सब ठीक है ना देश में " ....... उसने फिर से चौकीदार से पुछा..

"हाँ सब ठीक है मुल्क में.. पर यह आपका मुल्क नहीं है आप लाहोर में हैं "
"यह पाकिस्तान हैं जनाब.. पाकिस्तान ...., आप हिंदुस्तान जाइए.. दिल्ली जाइए..."

वोह घबरा गया... "पकिस्तान ?? हिन्दुस्तान ??

" हाँ बेटा अब तो चौंसठ साल हो गए" चौकीदार ने उसकी आखों में देखते हुए कहा...

वोह मुड कर वापस अँधेरे की तरफ जाने लगा... हलके हलके कदमों से... वापस मुड कर नहीं देखा... बस चला जा रहा था ... धीरे धीरे...

चेहरे पर हंसी नहीं थी अब... आखें भीग आयीं थी .... वोह इतना कमज़ोर नहीं था.. फाँसी पर भी हँसते हँसते चढ़ा था वह ...... पर आज आखें भीग आयीं थी..


जान दी थी उसने.... जान.....

Sunday, February 16, 2014

यादें.........

उसकी खुशी के लिये, बहुत दूर चले आये उससे भी
और लोग कहते है आज, हमें प्रेम करना नहीं आया 

किसी की याद में जलना प्रेम नहीं शायद
उन यादों को दिल में बसाये रखना प्रेम है 

जो हमारे दिल को अज़ीज हो, तनहा छोड़ जायें गर
जब यादें भूला बेगाने बन जाये वो, तकलीफ़ होती है

उनकी यादें दिल में बसी हो, तनहा जिंदगी हो
वो अनजान बन राहें बदल ले, तकलीफ होती है 

झूठे है वे लोग, जो कहते है यादें तन्हाई में सहारा है
मै कहता हूँ ,वे यादें ही तो है जो हमें तनहा करती है...